युद्ध की तपिश... साबुन की कीमतें आसमान पर!
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और समुद्री परिवहन मार्गों में रुकावटें रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की लागत बढ़ा रही हैं। कच्चे माल और पैकेजिंग का खर्च लगातार बोझ बनता जा रहा है, जिसके चलते साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट और अन्य कई रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने पहले ही Liril, Pears और Dove जैसे ब्रांडों के उत्पादों की कीमतें ₹2 से ₹3 तक बढ़ा दी हैं।










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