• Jan 15, 2026
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    Pollution Ka Solution Conclave: इंडिया टीवी के 'पॉल्यूशन का सॉल्यूशन कॉन्क्लेव' में बोलते हुए, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर और सीनियर साइंटिस्ट मोहन पी जॉर्ज ने इस बात पर जोर दिया कि वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ एक कारण, जैसे कि गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण कई कारणों का नतीजा हैं, जिनमें इंडस्ट्रियल एक्टिविटी, कचरा प्रबंधन, कंस्ट्रक्शन की धूल और जीवनशैली शामिल हैं। नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है वायु प्रदूषण जॉर्ज ने इस बात पर जोर दिया कि वायु प्रदूषण का संकट सिर्फ दिल्ली या पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा, "प्रदूषण को कम करने के लिए जनता में जागरूकता और बुनियादी पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी है।" ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-4) का जिक्र करते हुए, उन्होंने बताया कि गंभीर प्रदूषण के समय इमरजेंसी उपाय लागू किए जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक सुधार लोगों के सहयोग पर निर्भर करता है। जॉर्ज ने एक व्यावहारिक चुनौती की ओर भी इशारा किया उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद, कई नागरिक सुविधा के कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बजाय अभी भी प्राइवेट गाड़ियों को पसंद करते हैं। जॉर्ज ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए कई उपाय लागू कर रही है, लेकिन सिर्फ नीतियों से नतीजे नहीं मिल सकते। उन्होंने सही कचरा प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया, और कहा कि अवैज्ञानिक तरीके से कचरा फेंकने और खुले में जलाने से हवा की क्वालिटी काफी खराब होती है। उन्होंने कहा कि कचरे को अलग-अलग करना और उसका निपटान करना दिल्ली के AQI लेवल को संतुलित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब यहां की हवा बेहद खराब श्रेणी में रहती है। बढ़ जाता है सांस और दिल की बीमारियों का खतरा 'पॉल्यूशन का सॉल्यूशन कॉन्क्लेव' में प्रोफेसर डॉ भोला राम गुर्जर ने कहा कि वायु प्रदूषण का सबसे अधिक असर नॉन-स्मोकर्स पर पड़ता है। NITTTR चंडीगढ़ के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ भोला राम गुर्जर ने नॉन-स्मोकर्स पर प्रदूषण के अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले स्वास्थ्य प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, यहां तक कि उन लोगों में भी जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। डॉ भोला राम गुर्जर ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण कंट्रोल सिर्फ अधिकारियों की नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। व्यवहार में बदलाव और सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई का आह्वान किया।

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