मराठी अस्मिता बनी बीएमसी चुनाव का बड़ा मुद्दा
Maharashtra Civic Polls 2026: महाराष्ट्र में आज महानगर पालिका चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने आज 15 जनवरी को उन सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, जहां नगर निकाय चुनाव हो रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी इस आदेश में मुंबई, पुणे, ठाणे और नवी मुंबई सहित 29 नगर निगम शामिल हैं। इसका उद्देश्य सुचारू मतदान सुनिश्चित करना और मतदान में भागीदारी बढ़ाना है।
क्या रहेगा बंद?
कार्यालय और संस्थान बंद
सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालय
निगम और बोर्ड
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
बैंक
BMC के अधिकार क्षेत्र में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालय
कई निजी कार्यालय भी बंद रह सकते हैं, हालांकि यह उनकी व्यक्तिगत संगठनात्मक नीतियों पर निर्भर करेगा।
सरकारी और नगर निगम द्वारा संचालित स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे
मुंबई में मुख्यालय होने के कारण BSE और NSE में 15 जनवरी को पूर्ण व्यापारिक अवकाश रहेगा। इक्विटी, डेरिवेटिव और कमोडिटी (सुबह का सत्र) में कोई कामकाज नहीं होगा।
आवश्यक सेवाएं और परिवहन
अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस और दमकल विभाग पूरी तरह सक्रिय रहेंगे।
लोकल ट्रेन और BEST बसें सामान्य रूप से चलेंग, ताकि मतदाता बिना किसी परेशानी के पोलिंग बूथ तक पहुंच सकें।
शराब पर पाबंदी
सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने 13 से 16 जनवरी तक चार दिनों का 'ड्राय डे' घोषित किया है।
इन 29 नगर निगम क्षेत्रों में शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
शराब की दुकानें, बार और परमिट रूम इस दौरान बंद रहेंगे।
मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था
वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाले एकल अभिभावकों के लिए प्राथमिकता के आधार पर मतदान की व्यवस्था।
सभी बूथों पर पीने का पानी, बिजली, शौचालय और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाएं।
2017 के बाद बीएमसी चुनाव
बता दें कि महाराष्ट्र के 29 महानगर पालिकाओं में आज सुबह साढ़े 7 बजे से वोटिंग हो रही है। 29 महानगर पालिकाओं में 2869 सीटों पर 15 हजार 931 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनकी किस्मत का फैसला राज्य की 3 करोड़ 49 लाख वोटर करेंगे।आज BMC के लिए भी वोटिंग हो रही है, जहां 2017 के बाद चुनाव हो रहे हैं।
इस बार का बीएमसी चुनाव काफी रोचक है, क्योंकि पहली बाद शिवसेना और एनसीपी दो गुटों में बंटने के बाद बीएमसी के चुनाव में आमने-सामने हैं। वहीं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 20 साल बाद हाथ मिला लिया है। मराठी अस्मिता बीएमसी चुनाव का सबसे जोरदार मुद्दा है। अगर ये मुद्दा चला तो बीएमसी चुनावों की फिजा कुछ अलग होगी।







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