ऐसे मंदिर भी हैं जहाँ पुरुषों का प्रवेश वर्जित है: केंद्र
केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक का बचाव किया है। सरकार ने कहा कि यह कोई भेदभाव नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही एक प्रथा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि देश में ऐसे मंदिर भी हैं जहाँ पुरुषों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इसलिए, उन्होंने तर्क दिया कि यह मुद्दा न तो पुरुष-वर्चस्व का है और न ही लिंग-केंद्रित मान्यताओं का।









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