धोखेबाजों के साथ मिलीभगत
लाखों "म्यूल अकाउंट" (mule accounts) बनाना—ऐसे अकाउंट जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी से चुराए गए करोड़ों रुपये को दूसरी जगह भेजने और हड़पने के लिए करते हैं; जालसाजों द्वारा जाली दस्तावेजों का उपयोग करके करोड़ों के ऋण प्राप्त करना और बाद में उन्हें चुकाने में चूक करना; और धोखेबाजों द्वारा जीवित व्यक्तियों की मृत्यु का नाटक करके बीमा भुगतान का गबन करना—पुलिस ने पहचान की है कि संबंधित वित्तीय संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारी इन सभी योजनाओं में शामिल हैं। इसके अलावा, जांचकर्ताओं ने इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि ये कर्मचारी अपने सहयोगियों को कैसे बचाते हैं, और आपराधिक जांच के दौरान किसी भी तरह का सहयोग देने से इनकार कर देते हैं।










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